
हमारी कहानी
हर मोड़ की कहानी
कंपनी का नाम एक वादे पर रखा गया है: राजस्थान में सड़क के हर मोड़ पर एक कहानी खड़ी मिलती है। ये रहीं वे कहानियाँ, शहर दर शहर।
नाम का मतलब
हर मोड़ पर एक कहानी
हर मोड़ पर एक नई कहानी।
राजस्थान अपना इतिहास किसी संग्रहालय में रखकर नहीं देता। वह हाथियों के लिए काटी गई ढलान में है, तीन सौ साल पहले नापी गई गली की चौड़ाई में है, उस दीवार में है जो नज़र से आगे तक चली जाती है। एक मोड़ मुड़िए, और अगली कहानी सामने खड़ी है।
यात्रा की हमारी पूरी सोच इसी पर टिकी है। चार क़िलों के बीच गाड़ी तो कोई भी घुमा सकता है। हम यह पक्का करने की कोशिश करते हैं कि गाड़ी से उतरते ही आपको पता हो कि आप क्या देख रहे हैं — और बताने के लिए कोई स्थानीय साथ हो।
इसलिए हमने उन्हें लिख डाला। जिन-जिन शहरों में हम काम करते हैं, वहाँ का हर किला, बावड़ी, झील और मंदिर — और हर एक के पीछे की कहानी। जहाँ प्रमाणित इतिहास है वहाँ इतिहास, और जहाँ सिर्फ़ लोककथा बची है वहाँ लोककथा।

संग्रह
27 शहर, 164 कहानियाँ
एक शहर चुनिए और पढ़ना शुरू कीजिए
6 कहानियाँजयपुरगुलाबी नगरी के नाम से पहचाने जाने वाले जयपुर की गलियाँ, किले और महल सिर्फ़ पत्थर नहीं हैं—हर दीवार के पीछे एक किस्सा साँस लेता है। कहीं रानियों के झरोखे हैं, कहीं झील में डूबा आरामगाह, कहीं दुनिया की सबसे बड़ी तोप तो कहीं तारों की चाल नापते पत्थर के यंत्र। आइए, शहर के मशहूर ठिकानों और उनसे जुड़ी दिलचस्प कहानियों से मिलते हैं।पढ़िए
6 कहानियाँबूंदीराजस्थान का बूंदी 'बावड़ियों का शहर' और 'हाड़ौती की रानी' कहलाता है। इसकी गलियों में शौर्य, चित्रकला और अनोखी प्रेम कहानियाँ एक साथ बसती हैं। शहर का नाम बूंदा मीणा से आया, और 1242 ईस्वी में राव देवा हाड़ा ने इसे जीतकर यहाँ हाड़ा राजवंश की नींव रखी। किले, बावड़ियाँ, झीलें और भित्ति चित्र — बूंदी हर कोने पर कोई न कोई कहानी सुनाता है।पढ़िए
6 कहानियाँकोटाकोटा को आज भारत की शिक्षा नगरी और कोचिंग हब के नाम से जाना जाता है, लेकिन यह शहर सिर्फ किताबों और क्लासरूम तक सीमित नहीं है। चंबल नदी के किनारे बसा यह ऐतिहासिक शहर हाड़ा चौहान राजपूतों की वीर भूमि रहा है। यहाँ के पुराने महल, शांत झीलें, गुफा मंदिर और घाटियाँ अपने साथ ऐसी कहानियाँ लेकर चलती हैं जो पढ़ाई की दुनिया से कहीं अलग हैं।पढ़िए
7 कहानियाँझालावाड़राजस्थान का झालावाड़ ज़िला पानी से घिरे नज़ारों, संतरों के बाग़ों और समृद्ध विरासत के लिए जाना जाता है; इसे राजस्थान का चेरापूंजी और नागपुर भी कहा जाता है। इसकी शुरुआत 1791 में कोटा के दीवान झाला ज़ालिम सिंह ने मराठा हमलों से बचने के लिए एक छावनी के रूप में की थी, और 1838 में यह अलग रियासत बनी जिसके पहले शासक राणा मदन सिंह हुए।पढ़िए
6 कहानियाँभरतपुरभरतपुर को राजस्थान का पूर्वी द्वार कहा जाता है। इस शहर की नींव 1733 में महाराजा सूरजमल ने रखी थी, और मान्यता है कि इसका नाम भगवान राम के भाई भरत के नाम पर पड़ा। अपने अभेद्य दुर्गों, राजसी इतिहास और सर्दियों में विदेशी परिंदों से गुलजार रहने वाले पक्षी अभयारण्य की वजह से यह शहर दुनिया भर के सैलानियों को अपनी ओर खींचता रहा है।पढ़िए
6 कहानियाँअलवरअरावली की गोद में बसा अलवर राजस्थान का 'सिंह द्वार' कहलाता है — वह चौखट जहाँ से मरुभूमि का इतिहास शुरू होता है। यहाँ के किले, झीलें, छतरियाँ और जंगल के मंदिर सिर्फ़ पत्थर नहीं हैं; हर एक के पीछे कोई श्राप, कोई प्रेम कहानी या कोई पौराणिक प्रसंग साँस लेता है। घूमने आइए, कहानियाँ खुद आपसे बात करेंगी।पढ़िए
6 कहानियाँसीकरराजस्थान का सीकर ज़िला शेखावाटी अंचल का दिल है, जहाँ रेत के टीलों के बीच बुलंद किले, रंगों से सजी हवेलियाँ और आस्था से भरे मंदिर एक साथ मिलते हैं। यहाँ की भित्ति-चित्रकारी वाली हवेलियाँ और चमत्कारी धार्मिक स्थल देश-विदेश के यात्रियों को खींच लाते हैं, और धार्मिक-सांस्कृतिक पर्यटन में यह छोटा-सा ज़िला आज बड़े शहरों से भी आगे निकल चुका है।पढ़िए
5 कहानियाँचूरूराजस्थान के शेखावाटी अंचल में बसा चूरू 'थार मरुस्थल का प्रवेश द्वार' कहलाता है। नक्काशीदार हवेलियाँ, रेत के टीले और पुरानी वास्तुकला इस शहर की पहचान हैं, मगर इसकी असली दौलत इसके किस्से हैं। यहाँ का हर किला, तालाब और मंदिर वीरता, त्याग और भक्ति की कोई न कोई कहानी अपने भीतर सँजोए बैठा है, जो सुनने वाले को सदियों पीछे ले जाती है।पढ़िए
6 कहानियाँझुंझुनूंराजस्थान के शेखावाटी अंचल में बसा झुंझुनू एक ऐसा शहर है जहाँ दीवारें खुद कहानियाँ सुनाती हैं। यहाँ की पुरानी हवेलियाँ, उन पर बने रंग-बिरंगे भित्तिचित्र और सदियों पुराने किले इसे दुनिया भर के यात्रियों और कला प्रेमियों के लिए खास बनाते हैं। मारवाड़ी व्यापारियों की समृद्धि, राजपूत और कायमखानी शासकों का इतिहास तथा लोक आस्था के मंदिर — सब कुछ इस जिले की गलियों में साथ-साथ मिलता है।पढ़िए
4 कहानियाँपुष्करअरावली की गोद में बसा पुष्कर वह तीर्थ है जिसे तीर्थराज यानी तीर्थों का राजा कहा जाता है। अजमेर से महज़ पंद्रह किलोमीटर दूर यह छोटा-सा कस्बा हिंदू धर्म के सबसे पवित्र स्थानों में गिना जाता है। पवित्र झील, घाटों की सीढ़ियाँ, संकरी बाज़ार गलियाँ और पहाड़ी पर बने मंदिर — यहाँ हर मोड़ पर कोई न कोई पौराणिक कहानी साँस लेती हुई मिल जाती है।पढ़िए
7 कहानियाँभीलवाड़ाराजस्थान का भीलवाड़ा 'टेक्सटाइल सिटी' यानी कपड़ों के शहर के नाम से पहचाना जाता है, पर इसकी असली दौलत इसका इतिहास और लोकसंस्कृति है। कहा जाता है कि शहर का नाम यहाँ बसी भील जनजाति से मिला, जिसने कभी महाराणा प्रताप को अकबर के विरुद्ध लड़ाई में साथ दिया था। आसपास फैले किले, झरने, मंदिर और गुरुद्वारे हर यात्री को अपनी अलग कहानी सुनाते हैं।पढ़िए
8 कहानियाँचित्तौड़गढ़चित्तौड़गढ़ में भारत का सबसे विशाल किला है — मैदान से ऊपर उठी पहाड़ी पर लगभग 700 एकड़ में फैला हुआ — और राजस्थान का सबसे भारी इतिहास। यह किला तीन बार लूटा गया, और तीनों बार यहाँ की स्त्रियों ने बंदी बनने के बजाय आग को चुना। आज यहाँ विजय का एक स्तंभ खड़ा है, वह महल जहाँ एक धाय ने अपना ही बेटा वार दिया, और उस रानी का मंदिर जो यह सब छोड़कर गाने चली गई।पढ़िए
6 कहानियाँउदयपुरझीलों की नगरी उदयपुर को सन 1553 में महाराणा उदयसिंह द्वितीय ने बसाया था। मुगल सम्राट अकबर के चित्तौड़गढ़ पर अधिकार कर लेने के बाद महाराणा ने अरावली की सुरक्षित पहाड़ियों के बीच मेवाड़ की नई राजधानी की नींव रखी। पानी, पहाड़ और संगमरमर के महलों से घिरा यह शहर आज भी अपनी हर गली में मेवाड़ के शौर्य की कहानी सुनाता हुआ लगता है।पढ़िए
6 कहानियाँराजसमंदअरावली की गोद में बसा राजसमंद जिला मेवाड़ के शौर्य, गौरवशाली इतिहास और शांत झीलों के लिए जाना जाता है। जिले को यह नाम यहीं की मशहूर राजसमंद झील से मिला, जिसे महाराणा राज सिंह प्रथम ने बनवाया था। कुंभलगढ़ की अजेय दीवारों से लेकर हल्दीघाटी के रणक्षेत्र और नाथद्वारा-कांकरोली के मंदिरों तक, यहाँ का हर पड़ाव अपने साथ कोई न कोई कहानी लेकर चलता है।पढ़िए
7 कहानियाँडूंगरपुरराजस्थान के दक्षिणी छोर पर बसा डूंगरपुर 'पहाड़ों की नगरी' कहलाता है। कहा जाता है कि 1258 ईस्वी में मेवाड़ के रावल वीर सिंह ने यह नगर बसाया था। तब यहाँ डूंगरिया नाम के भील मुखिया का राज था, और युद्ध में उन्हें हराने के बाद वीर सिंह ने उन्हीं के नाम पर शहर का नाम रखा। हरी पहाड़ियाँ, शांत झीलें और वागड़ की लोक-कथाएँ यहाँ की पहचान हैं।पढ़िए
6 कहानियाँदौसादौसा राजस्थान का एक ऐतिहासिक और सांस्कृतिक जिला है, जिसे लोग 'देव नगरी' कहकर पुकारते हैं। इसका नाम संस्कृत के 'धौ-सा' से आया माना जाता है, जिसका अर्थ है स्वर्ग जैसा सुंदर। इतिहास में झाँकें तो यही भूमि कछवाहा राजवंश की पहली राजधानी रही। आज यहाँ की बावड़ियाँ, पहाड़ी किले और चमत्कारी मंदिर यात्रियों को उतना ही लुभाते हैं, जितना कभी राजाओं को लुभाते थे।पढ़िए
5 कहानियाँकरौलीराजस्थान का करौली जिला अपने गौरवशाली अतीत, नक्काशीदार वास्तुकला और गहरी आस्था के लिए जाना जाता है। कभी इसे 'कल्याणपुरी' कहा जाता था, जिसे यदुवंशी राजा अर्जुन पाल ने 1348 ईस्वी में बसाया था। यहाँ के शासक स्वयं को भगवान श्रीकृष्ण का सीधा वंशज मानते आए हैं। लाल पत्थर के महल, पहाड़ियों में बसे मंदिर और सदियों पुरानी लोककथाएँ इस शहर को यात्रियों के लिए खास बनाती हैं।पढ़िए
5 कहानियाँधौलपुरधौलपुर को 'रेड डायमंड सिटी' यानी लाल पत्थरों की भूमि कहा जाता है। चंबल नदी, उसके उजाड़ बीहड़ और यहाँ निकलने वाला खास लाल बलुआ पत्थर इस शहर को दुनिया भर में पहचान दिलाते हैं। ऐतिहासिक इमारतों के साथ-साथ यह शहर पौराणिक कथाओं के लिए भी जाना जाता है — किले, घंटाघर, मकबरे, शाही शिकारगाह और तीर्थ सरोवर, हर जगह के पीछे अपनी एक कहानी है।पढ़िए
6 कहानियाँब्यावरअरावली की पहाड़ियों के बीच बसा ब्यावर राजस्थान का एक ऐतिहासिक शहर और जिला है, जिसकी अपनी अलग ही पहचान है। इस बस्ती की नींव सन् 1836 में ब्रिटिश अफ़सर कर्नल चार्ल्स जॉर्ज डिक्सन ने रखी थी। यहाँ की सीधी-समानांतर गलियाँ, पुराने दरवाज़े, अरावली की हरी वादियाँ और होली के रंगों में डूबा बादशाह मेला — हर चीज़ अपने साथ एक दिलचस्प कहानी लेकर चलती है।पढ़िए
5 कहानियाँनागौरनागौर का इतिहास असाधारण रूप से समृद्ध है। महाभारत काल में यह इलाका 'जांगलदेश' कहलाता था और अहिछत्रपुर, यानी आज का नागौर, उसकी राजधानी था। यह धरती एक साथ तीन रंगों में रंगी है — राजपूतों की तलवार का शौर्य, सूफी संतों की आस्था और भक्तिकाल के प्रेम की मिठास। किले, छतरियाँ, दरगाहें और मंदिर यहाँ हर कदम पर कोई न कोई कहानी सुनाते हैं।पढ़िए
7 कहानियाँहनुमानगढ़राजस्थान के उत्तरी छोर पर बसा हनुमानगढ़ प्राचीन काल में 'भटनेर' कहलाता था। इसके आज के नाम के पीछे एक दिलचस्प किस्सा है—सन 1805 में बीकानेर के राजा सूरत सिंह ने भाटी शासकों को हराकर यहाँ का किला जीत लिया। वह जीत मंगलवार के दिन मिली, जो हनुमान जी का पवित्र दिन माना जाता है, इसीलिए राजा ने शहर का नाम बदलकर हनुमानगढ़ रख दिया।पढ़िए
5 कहानियाँश्रीगंगानगरराजस्थान का सबसे उत्तरी ज़िला श्री गंगानगर भारत-पाकिस्तान सीमा से सटा हुआ है और गंग नहर के पानी ने इसे रेगिस्तान के बीच हरे-भरे खेतों की पट्टी बना दिया है। यहाँ की कहानियाँ भी उतनी ही रंगीन हैं — प्रेम की एक मज़ार, रेत के बीच गुरु का जोहड़, घग्गर किनारे खड़ा पुराना किला, सरहद की चौकियाँ और ज़मीन के नीचे दबे सिंधु घाटी सभ्यता के अवशेष।पढ़िए
6 कहानियाँपालीपाली मारवाड़ की वह धरती है जहाँ गौरवशाली इतिहास, गहरी धार्मिक आस्था और अरावली की प्राकृतिक सुंदरता एक साथ मिलती हैं। प्राचीन काल में इस शहर को पल्लिका कहा जाता था, और आज का नाम यहाँ बसे शुरुआती निवासियों — पालीवाल ब्राह्मणों — की याद दिलाता है। मंदिर, विशाल बांध, तालाब से घिरे बाग और पहाड़ी गुफाएँ मिलकर इस शहर को यात्रियों के लिए कहानियों का ख़ज़ाना बना देते हैं।पढ़िए
5 कहानियाँजोधपुरनीले रंग में रंगे मकानों वाला जोधपुर मारवाड़ की धरती का वह शहर है, जहाँ हर गली किसी न किसी कहानी को अपने साथ लिए चलती है। ऊँची पहाड़ी पर खड़ा किला, सफ़ेद पत्थर की शाही समाधियाँ, पुरानी राजधानी के बाग़ और बाज़ार की रौनक—यहाँ इतिहास और लोककथाएँ साथ-साथ चलती हैं। आइए, शहर के प्रमुख ठिकानों और उनसे जुड़ी कहानियों को करीब से जानें।पढ़िए
5 कहानियाँजालोरराजस्थान के दक्षिण-पश्चिमी कोने में बसा जालोर वह शहर है जिसे प्राचीन ग्रंथों में जाबालिपुर कहा गया। ग्रेनाइट की पहाड़ियों पर खड़े इसके दुर्ग, अरावली की चोटियों पर बसे मंदिर और यहाँ के लोगों का स्वाभिमान—सब मिलकर एक ऐसी कहानी बुनते हैं जो सदियों पुरानी है। हर किले की दीवार और हर देवालय के पीछे यहाँ एक किस्सा छिपा बैठा है।पढ़िए
9 कहानियाँबाड़मेरथार रेगिस्तान में बसा बाड़मेर राजस्थान का वह ज़िला है जहाँ सुनहरी रेत, लोकगीतों की गूँज और सदियों पुराना इतिहास एक साथ मिलते हैं। कहा जाता है कि तेरहवीं शताब्दी में बसे इस शहर को इसका नाम इसके संस्थापक रावत बहाड़ राव से मिला — बहाड़मेर, जो समय के साथ बाड़मेर हो गया। यहाँ के मंदिर, किले और ऊँचे धोरे यात्री को मरुधरा की असली आत्मा से मिलवाते हैं।पढ़िए
8 कहानियाँबांसवाड़ाबांसवाड़ा राजस्थान का वह कोना है जहाँ रेगिस्तान की तस्वीर पूरी तरह बदल जाती है। 'सौ द्वीपों का शहर' और 'राजस्थान का चेरापूंजी' कहा जाने वाला यह जिला हरी वादियों, बहती नदियों और घने पहाड़ों से घिरा है। यहाँ की मिट्टी में आदिवासी संस्कृति, प्राचीन मंदिर और लोक-कथाएँ इस तरह घुली हैं कि हर पड़ाव अपने साथ एक कहानी लेकर चलता है और हर मोड़ पर कुछ नया खुलता है।पढ़िए
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आपकी राजस्थान की कहानी यहीं से शुरू होती है।
बताइए आपको कहाँ जाना है। सफ़र को यादगार बनाना हमारा काम है।