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हर मोड़ की कहानी

करौली

राजस्थान का करौली जिला अपने गौरवशाली अतीत, नक्काशीदार वास्तुकला और गहरी आस्था के लिए जाना जाता है। कभी इसे 'कल्याणपुरी' कहा जाता था, जिसे यदुवंशी राजा अर्जुन पाल ने 1348 ईस्वी में बसाया था। यहाँ के शासक स्वयं को भगवान श्रीकृष्ण का सीधा वंशज मानते आए हैं। लाल पत्थर के महल, पहाड़ियों में बसे मंदिर और सदियों पुरानी लोककथाएँ इस शहर को यात्रियों के लिए खास बनाती हैं।

कहानियाँ

5 जगहें, और हर एक पर क्या हुआ था

  1. कैला देवी मंदिर

    इतिहास और किंवदंती

    त्रिकूट पहाड़ियों की गोद में, कालीसिल नदी के किनारे बसा कैला देवी का यह मंदिर उत्तर भारत के प्रसिद्ध शक्तिपीठों में गिना जाता है। कथा कहती है कि जब कंस ने देवकी की आठवीं संतान को पत्थर पर पटकना चाहा, तो वह कन्या उसके हाथ से छूटकर आकाश में उठ गई और महाशक्ति के रूप में प्रकट हुई। मान्यता है कि वही योगमाया यहाँ कैला देवी बनकर विराजीं। यहाँ लगने वाला लक्खी मेला और भक्तों के गाए 'लांगुरिया' गीत पूरे देश में मशहूर कहे जाते हैं।

  2. करौली सिटी पैलेस

    इतिहास और किंवदंती

    लाल और सफेद बलुआ पत्थर से बने करौली के सिटी पैलेस की नींव चौदहवीं सदी की कही जाती है, पर आज जो भव्यता दिखती है वह मुख्यतः अठारहवीं सदी का काम है, जिसका श्रेय राजा गोपाल सिंह को दिया जाता है। लोककथा के अनुसार राजा अर्जुन पाल शिकार खेलते हुए भद्रावती नदी के किनारे पहुँचे और देखा कि एक शेर और एक गाय बिना किसी डर या बैर के साथ-साथ पानी पी रहे हैं। इस दृश्य को शुभ संकेत मानकर उन्होंने ठीक उसी जगह अपने महल की और कल्याणपुरी यानी आज के करौली की नींव रखी। महल के आँगन, झरोखे और भित्तिचित्र आज भी उस कहानी की गवाही देते हैं।

  3. श्री मदन मोहन जी मंदिर

    इतिहास और किंवदंती

    करौली के सिटी पैलेस (किले) परिसर में बना श्री मदन मोहन जी मंदिर शहर का सबसे पूजनीय कृष्ण मंदिर है। कहा जाता है कि यह विग्रह पहले वृंदावन में विराजमान था। परंपरा के अनुसार, मुग़ल शासक औरंगज़ेब के मंदिर तोड़ने के दौर में मूर्ति की रक्षा के लिए उसे जयपुर ले जाया गया। मान्यता है कि बाद में करौली के राजा गोपाल सिंह को स्वप्न में भगवान के दर्शन हुए और वे पूरे आदर के साथ उस विग्रह को अपने नगर ले आए तथा यहीं उन्होंने यह भव्य मंदिर बनवाया। आज भी यहाँ दिन भर आरती और भजनों की गूँज बनी रहती है।

  4. तिमनगढ़ किला

    किंवदंती

    करौली से करीब चालीस किलोमीटर दूर खड़ा तिमनगढ़ किला अपने सन्नाटे और रहस्य के लिए जाना जाता है। यहाँ सबसे ज़्यादा सुनाई जाने वाली लोककथा 'नटनी के श्राप' की है। कथाओं में जिस राजा का नाम तिमनपाल बताया जाता है, कहते हैं उसने एक नटनी को चुनौती दी थी कि दो पहाड़ियों के बीच बंधी रस्सी पार कर ले तो आधा राज्य उसका। नटनी जब सधे कदमों से आगे बढ़ने लगी, तो हार के डर से दरबारियों ने रस्सी काट दी। नीचे गिरते हुए उसने श्राप दिया कि यह किला कंकड़-पत्थर में बदल जाएगा। आसपास के गाँव आज भी मानते हैं कि यहाँ मूर्तियाँ और खज़ाना मिट्टी में दबे हैं।

  5. श्री महावीर जी जैन मंदिर

    इतिहास और किंवदंती

    करौली जिले का श्री महावीर जी मंदिर दिगंबर जैन परंपरा का सुप्रसिद्ध तीर्थ है। यहाँ की कथा एक टीले से शुरू होती है। कहते हैं कि चरने निकली गायें उस टीले पर पहुँचते ही अपने आप दूध बहाने लगती थीं। यह देखकर गाँव वालों ने कौतूहल में खुदाई की, तो मिट्टी के भीतर से भगवान महावीर की मूंगिया रंग की, बलुआ पत्थर की एक सुंदर प्रतिमा निकली। उसी प्रतिमा के प्रकट होने के बाद यहाँ यह भव्य मंदिर बनवाया गया, जहाँ आज देश भर से श्रद्धालु दर्शन के लिए पहुँचते हैं।

आपकी राजस्थान की कहानी यहीं से शुरू होती है।

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