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हर मोड़ की कहानी

भरतपुर

भरतपुर को राजस्थान का पूर्वी द्वार कहा जाता है। इस शहर की नींव 1733 में महाराजा सूरजमल ने रखी थी, और मान्यता है कि इसका नाम भगवान राम के भाई भरत के नाम पर पड़ा। अपने अभेद्य दुर्गों, राजसी इतिहास और सर्दियों में विदेशी परिंदों से गुलजार रहने वाले पक्षी अभयारण्य की वजह से यह शहर दुनिया भर के सैलानियों को अपनी ओर खींचता रहा है।

कहानियाँ

6 जगहें, और हर एक पर क्या हुआ था

  1. लोहागढ़ किला

    इतिहास और किंवदंती

    1730 के दशक में महाराजा सूरजमल ने यह किला खड़ा करवाया था। इसकी हिफाजत सिर्फ पत्थर से नहीं, बल्कि मिट्टी की मोटी परतों से भी होती थी — और यही इसकी सबसे बड़ी ताकत साबित हुई। लॉर्ड लेक के नेतृत्व में अंग्रेजी फौज ने बार-बार तोपें गरजाईं और बारूद झोंका, मगर गोले मिट्टी में धँसकर बेअसर हो जाते थे। एक के बाद एक घेराबंदी नाकाम रही, और इसीलिए इसे लोहागढ़, यानी लोहे का किला कहा गया — आज भी कहा जाता है कि यह देश का इकलौता किला था जिसे अंग्रेज कभी न जीत सके। मगर 1826 में लॉर्ड कॉम्बरमियर की फौज ने आखिरकार इसकी दीवारें तोड़ ही दीं।

  2. केवलादेव घना राष्ट्रीय उद्यान

    इतिहास

    आज जिसे केवलादेव राष्ट्रीय उद्यान कहते हैं, वह कभी भरतपुर बर्ड सेंचुरी के नाम से जाना जाता था। कहा जाता है कि करीब ढाई सौ साल पहले महाराजा सूरजमल ने इस दलदली भूमि को इंसानी हाथों से गढ़ा था। इसके भीतर बना भगवान शिव का प्राचीन केवलादेव मंदिर ही इसे नाम दे गया। एक जमाने में यह भरतपुर के राजाओं और उनके अंग्रेज मेहमानों का बतख-शिकार का मैदान था, जहाँ एक ही दिन में हजारों परिंदे मार दिए जाते थे। 1982 में इसे राष्ट्रीय उद्यान घोषित किया गया और यूनेस्को विश्व धरोहर सूची में शामिल यह जगह आज भी सर्दियों में प्रवासी परिंदों से भर जाती है — हालाँकि साइबेरियन क्रेन यहाँ 2002 के बाद नहीं दिखी।

  3. डीग पैलेस और जल महल

    इतिहास और किंवदंती

    डीग भरतपुर के राजाओं की पहली राजधानी था। यहाँ का महल महाराजा बदन सिंह ने बनवाना शुरू किया और उनके बेटे सूरजमल ने उसे इतना भव्य बना दिया कि वह मुगल स्थापत्य कला को सीधी टक्कर दे सके। कहा जाता है कि दिल्ली पर चढ़ाई के बाद सूरजमल मुगल महलों से संगमरमर की इमारतें और तमाम कीमती सामान उखाड़कर अपने साथ डीग ले आए थे। महल की सबसे बड़ी खूबी हैं इसके सैकड़ों फव्वारे, जो आधुनिक मशीनों से नहीं, बल्कि गुरुत्व पर चलने वाली एक अनोखी पुरानी तकनीक से चलते थे। जब ये एक साथ छूटते हैं तो लगता है जैसे सावन-भादों की झड़ी लग गई हो।

  4. गंगा महारानी मंदिर

    इतिहास और किंवदंती

    शहर के ऐन बीच खड़ा गंगा महारानी मंदिर भरतपुर की वास्तुकला का सबसे सुंदर नमूना माना जाता है। इसकी कहानी महाराजा बलवंत सिंह से जुड़ी है, जो परंपरा के अनुसार लंबे समय तक संतान से वंचित रहे। कहते हैं उन्होंने मन्नत मांगी थी कि पुत्र की प्राप्ति हुई तो गंगा मैया का भव्य मंदिर बनवाएंगे। मन्नत पूरी हुई और नींव भी पड़ गई, मगर मंदिर के पूरा होने में करीब नब्बे बरस लग गए — कई पीढ़ियाँ इसे बनते हुए देखती रहीं। कहा जाता है कि मूर्ति के लिए पवित्र गंगाजल सीधे हरिद्वार से मंगवाया गया था।

  5. लक्ष्मण मंदिर

    इतिहास और किंवदंती

    भगवान राम के मंदिर तो पूरे देश में मिल जाते हैं, पर उनके भाई लक्ष्मण को समर्पित मंदिर गिनती के ही हैं। कहा जाता है कि भरतपुर का नाम राम के भाई भरत के नाम पर पड़ा, हालाँकि यहाँ के राजवंश ने अपना वंश-सूत्र कहीं और से जोड़ा। इतना तय है कि राजाओं ने लक्ष्मण जी को अपना कुलदेवता माना, और परंपरा के अनुसार शहर के बीचों-बीच यह भव्य मंदिर उन्हीं ने खड़ा करवाया। राजस्थानी बलुआ पत्थर से बना यह मंदिर अपनी बेहद बारीक नक्काशी के लिए देखने लायक है।

  6. भरतपुर पैलेस और संग्रहालय

    इतिहास

    भरतपुर पैलेस को देखकर लगता है जैसे दो अलग-अलग परंपराएँ एक ही छत के नीचे आ बैठी हों — इसकी बनावट में राजपूत और मुगल शैली का बेहतरीन मेल दिखाई देता है। महल के जिस हिस्से को कमरा खास कहा जाता है, वहाँ आज एक सरकारी संग्रहालय चलता है। यहाँ ठहरकर सैलानी भरतपुर के बीते दिनों से जुड़ी चीज़ों को करीब से देख सकते हैं, और महल की चुप्पी में इस रियासत के पुराने ठाठ का अंदाजा लगा सकते हैं।

आपकी राजस्थान की कहानी यहीं से शुरू होती है।

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