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RJ Travel Junctionहर मोड़ पर एक नई कहानी।

हर मोड़ की कहानी

श्रीगंगानगर

राजस्थान का सबसे उत्तरी ज़िला श्री गंगानगर भारत-पाकिस्तान सीमा से सटा हुआ है और गंग नहर के पानी ने इसे रेगिस्तान के बीच हरे-भरे खेतों की पट्टी बना दिया है। यहाँ की कहानियाँ भी उतनी ही रंगीन हैं — प्रेम की एक मज़ार, रेत के बीच गुरु का जोहड़, घग्गर किनारे खड़ा पुराना किला, सरहद की चौकियाँ और ज़मीन के नीचे दबे सिंधु घाटी सभ्यता के अवशेष।

कहानियाँ

5 जगहें, और हर एक पर क्या हुआ था

  1. लैला-मजनूं की मज़ार

    किंवदंती

    अनूपगढ़ तहसील के बिंजौर गाँव में, श्री गंगानगर से करीब 120 किलोमीटर दूर, खुले रेगिस्तान में अमर प्रेम की एक मज़ार खड़ी है। लोक विश्वास कहता है कि लैला और मजनूं भटकते हुए इसी वीराने तक पहुँचे थे और यहीं उन्होंने आख़िरी साँस ली। तभी से यह जगह प्रेमियों का अपना तीर्थ बन गई। हर साल जून के महीने में यहाँ मेला भरता है, जिसमें शादीशुदा और प्रेमी जोड़े दूर-दूर से आकर अपने रिश्ते की लंबी उम्र की मन्नत माँगते हैं। सूरज ढलते ही यहाँ का सन्नाटा किसी पुरानी दास्तान-सा महसूस होता है।

  2. बुड्ढा जोहड़ गुरुद्वारा

    इतिहास

    जैतसर के पास रायसिंहनगर क्षेत्र में बसा बुड्ढा जोहड़ सिख समाज के सबसे श्रद्धेय ऐतिहासिक स्थलों में गिना जाता है। कहा जाता है कि इस गुरुद्वारे का निर्माण संत फतेह सिंह ने करवाया था। यहाँ सहेजी गई स्मृतियाँ भाई सुखा सिंह और भाई महताब सिंह की हैं, जो अगस्त 1740 में हरमंदिर साहिब की बेअदबी करने वाले मस्सा रंघड़ का सिर लेकर इसी रेगिस्तानी शरणस्थली तक आए थे, और उन सिखों की हैं जो यहाँ शहीद हुए। परिसर के भीतर एक बड़ा जोहड़ है, पानी सहेजने वाला परंपरागत तालाब, जिससे इस जगह को इसका नाम मिला। रेगिस्तानी हवा, ठहरा हुआ पानी और आँगन में गूँजता कीर्तन मिलकर ऐसा माहौल बनाते हैं कि यात्री सोचे हुए वक़्त से कहीं ज़्यादा देर ठहर जाते हैं।

  3. अनूपगढ़ का क़िला

    इतिहास

    घग्गर नदी के किनारे, अनूपगढ़ शहर में खड़ा यह किला भारत-पाकिस्तान सीमा के करीब है। कहा जाता है कि इसे सत्रहवीं सदी में बनवाया गया — अधिकतर विवरण इसका श्रेय बीकानेर के महाराजा अनूप सिंह को देते हैं, जिनके नाम पर इसका नाम पड़ा, हालाँकि कुछ स्रोत इसे कुछ बाद का और किसी मुग़ल सूबेदार का बनवाया बताते हैं — ताकि इलाके पर पकड़ बनी रहे और स्थानीय विद्रोहों से रक्षा हो सके। परंपरा के अनुसार इसकी दीवारों ने लड़ाइयाँ और सैनिक हलचल देखीं। आज इसे काफ़ी हद तक खंडहर बताया जाता है, फिर भी मोटी बुर्जें और बचे हुए दरवाज़े उस पुराने शाही ढाँचे की झलक देते हैं — शाम की आख़िरी रोशनी में सबसे तस्वीरनुमा।

  4. हिंदुमलकोट सीमा

    इतिहास और किंवदंती

    श्री गंगानगर से करीब 25 किलोमीटर दूर यह जगह भारत-पाकिस्तान अंतरराष्ट्रीय सीमा पर बसी है। स्थानीय परंपरा इस कहानी को 1914 तक ले जाती है, जब कहा जाता है कि बीकानेर रियासत ने यहाँ हदबंदी करवाई थी। बताया जाता है कि उस दौरान रियासत के दीवान हिंदुमल भी इस इलाके में आए हुए थे और बीमार पड़कर यहीं चल बसे; उन्हीं की याद में गाँव का पुराना नाम ओड़की बदलकर हिंदुमल कर दिया गया, जो आगे चलकर हिंदुमलकोट कहलाया। आज यात्री यहाँ सरहद को बिलकुल पास से देखते हैं, कँटीली तार के उस पार नज़र डालते हैं और बीएसएफ के जवानों की मुस्तैदी को महसूस करते हैं।

  5. बड़ोर गाँव के प्राचीन अवशेष

    इतिहास

    अनूपगढ़ के पास बड़ोर गाँव की मिट्टी के नीचे हज़ारों साल पुरानी एक दुनिया दबी हुई है। यह पुरास्थल सिंधु घाटी सभ्यता से जुड़ा है और खुदाई के दौरान यहाँ से प्राचीन बर्तन, मनके और हड़प्पा काल की कई वस्तुएँ मिली हैं। ऊपर से देखने पर यह खेतों के बीच सिर्फ़ एक टीला लगता है, लेकिन इतिहास प्रेमियों के लिए यह किसी खज़ाने से कम नहीं। यहाँ खड़े होकर आप सोच सकते हैं कि कभी इसी जगह बसी बस्ती के लोग बर्तन गढ़ते और व्यापार करते होंगे — घग्गर के अब सूख चुके रास्ते के किनारे पली एक भूली-बिसरी सभ्यता।

आपकी राजस्थान की कहानी यहीं से शुरू होती है।

बताइए आपको कहाँ जाना है। सफ़र को यादगार बनाना हमारा काम है।