+91-7357-169-795
RJ Travel Junctionहर मोड़ पर एक नई कहानी।

हर मोड़ की कहानी

उदयपुर

झीलों की नगरी उदयपुर को सन 1553 में महाराणा उदयसिंह द्वितीय ने बसाया था। मुगल सम्राट अकबर के चित्तौड़गढ़ पर अधिकार कर लेने के बाद महाराणा ने अरावली की सुरक्षित पहाड़ियों के बीच मेवाड़ की नई राजधानी की नींव रखी। पानी, पहाड़ और संगमरमर के महलों से घिरा यह शहर आज भी अपनी हर गली में मेवाड़ के शौर्य की कहानी सुनाता हुआ लगता है।

कहानियाँ

6 जगहें, और हर एक पर क्या हुआ था

  1. सिटी पैलेस

    इतिहास और किंवदंती

    सिटी पैलेस की नींव महाराणा उदयसिंह द्वितीय ने रखी थी, जिसे आमतौर पर सन 1559 का माना जाता है। लोककथा कहती है कि अरावली की पहाड़ियों में शिकार करते हुए महाराणा की भेंट एक ऋषि से हुई। ऋषि ने उन्हें इसी पहाड़ी पर महल बनाने की सलाह दी और कहा कि यहाँ बना भवन सदा सुरक्षित रहेगा। कहते हैं, महाराणा ने ठीक वैसा ही किया। पहाड़ी पर फैला यह विशाल महल मेवाड़ के शासकों के अदम्य साहस का साक्षी है, और इसके संग्रहालय में रखे कवच और तलवार के बारे में कहा जाता है कि वे महाराणा प्रताप के थे।

  2. पिछोला झील और लेक पैलेस

    इतिहास और किंवदंती

    पिछोला झील के बारे में कहा जाता है कि यह चौदहवीं शताब्दी की है, परंपरा के अनुसार महाराणा लाखा के शासनकाल की, हालाँकि स्रोत इस पर एकमत नहीं हैं। कहते हैं कि पिच्छू नाम के एक बंजारे ने अपने बैलों की याद में इसे खुदवाया था; आगे चलकर महाराणा उदयसिंह ने इसका काफ़ी विस्तार करवाया। झील के बीच तैरते लेक पैलेस यानी जग निवास की कहानी भी उतनी ही रोचक है। सुनते हैं कि महाराणा जगतसिंह द्वितीय को पिता के महल में चाँदनी रातों की महफ़िलें सजाने की इजाज़त नहीं मिली, तो नाराज़ होकर उन्होंने पानी के बीचोंबीच अपने लिए यह सफ़ेद महल बनवा लिया, जिसे आज अकसर दुनिया का सबसे रोमांटिक होटल कहा जाता है।

  3. जग मंदिर

    इतिहास और किंवदंती

    पिछोला झील के एक द्वीप पर बना जग मंदिर महाराणा अमर सिंह ने शुरू करवाया और महाराणा जगत सिंह ने इसे पूरा किया। इससे जुड़ी सबसे मशहूर कहानी मुगल शहजादे खुर्रम की है, जो आगे चलकर सम्राट शाहजहाँ बने। जब खुर्रम ने अपने पिता जहांगीर के खिलाफ बगावत की, तब महाराणा करन सिंह ने उन्हें इसी द्वीप-महल में पनाह दी थी। यहाँ की लोक-परंपरा में कहा जाता है कि यहाँ के नाज़ुक संगमरमर के काम और गोल गुंबदों की छवि शहजादे के मन में बस गई और आगे चलकर ताजमहल की कल्पना को आकार दिया — यह कहानी उदयपुर में बड़े चाव से सुनाई जाती है, पर इतिहास में इसका कोई प्रमाण दर्ज नहीं है।

  4. सहेलियों की बाड़ी

    इतिहास और किंवदंती

    सहेलियों की बाड़ी का निर्माण महाराणा संग्राम सिंह द्वितीय ने करवाया था। इससे जुड़ी कहानी यह है कि उदयपुर की राजकुमारी को दहेज में अड़तालीस जवान सहेलियों का साथ मिला था, और यह बाग़ खास तौर पर शाही घराने की स्त्रियों तथा उन्हीं अड़तालीस साथिनों के लिए बनवाया गया। शहर के शोर से दूर, फव्वारों की फुहार, कमल से भरे तालाब और घनी हरियाली के बीच वे यहाँ अपना समय बिता सकती थीं। आज भी बाग़ में घूमते हुए वही सुकून भरा माहौल महसूस होता है।

  5. सज्जनगढ़ पैलेस / मानसून पैलेस

    इतिहास और किंवदंती

    बांसडारा पहाड़ी की चोटी पर खड़ा सज्जनगढ़ पैलेस उदयपुर के सबसे मशहूर महलों में गिना जाता है। इसकी नींव महाराणा सज्जन सिंह ने 1884 में रखी थी, और उसी साल दिसंबर में उनके निधन के समय यह अधूरा ही था। कहा जाता है कि वे इसे एक खगोलीय केंद्र बनाना चाहते थे, जहाँ से बादलों की चाल देखी जा सके और मानसून का सटीक अंदाज़ा लगाया जा सके; मान्यता है कि वह योजना उन्हीं के साथ रह गई। फिर भी महल ने अपनी अलग पहचान बना ली। आज लोग यहाँ बरसाती बादलों को नज़दीक से देखने और शहर पर ढलते सूरज का नज़ारा लेने पहुँचते हैं।

  6. फतेह सागर झील

    इतिहास

    फतेह सागर झील के बारे में कहा जाता है कि इसे सबसे पहले सत्रहवीं सदी के आख़िर में महाराणा जयसिंह ने बनवाया था, लेकिन भारी बाढ़ में इसका बांध टूट गया और झील उजड़ गई। बरसों बाद महाराणा फतेह सिंह ने इसका दोबारा निर्माण करवाया, और तभी से यह उन्हीं के नाम पर फतेह सागर कहलाने लगी। झील के बीच टापू पर बना नेहरू गार्डन नाव से पहुँचने वालों को खूब लुभाता है, और इसी फतेह सागर पर भारत की मशहूर सौर वेधशाला भी है, जहाँ से वैज्ञानिक सूरज पर नज़र रखते हैं।

आपकी राजस्थान की कहानी यहीं से शुरू होती है।

बताइए आपको कहाँ जाना है। सफ़र को यादगार बनाना हमारा काम है।